IAS Success Story Of Veer Pratap Singh Raghav : किसान का बेटा असफलताओं का सामना कर बना IAS

IAS Success Story Of Veer Pratap Singh Raghav : आज हम आप को एक ऐसे सक्ख्स के बारे में बताने जा रहे है ! जिन्होंने कई परेशानियों का सामना कर अपने सपने को पूरा किया है ! बुलंदशहर के किसान के बेटे वीर प्रताप सिंह राघव ने बचपन से आर्थिक ठीक नहीं रहती थी ! लेकिन राघव को इक्छा और पढ़ने  की ललक का ही नतीजा है ! वह आज Indian Administrative Service बन चूका है ! आज बे अपने सपने को पूरा कर बहुत खुश है ! और अपनी नौकरी का अछि तरिके से कर रहे है !

IAS Success Story Of Veer Pratap Singh Raghav

IAS Success Story Of Veer Pratap Singh Raghav

IAS Success Story Of Veer Pratap Singh Raghav

वीर प्रताप सिंह राघव के पिता किसान थे ! उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी! वे चाहकर भी शिक्षा पूरी नहीं कर पा रहे थे ! उनके बड़े भाई भी Union Public Service Commission सिविल सर्विसेस की तैयारी करना चाहते थे ! पर पैसे के अभाव में उनकी यह इच्छा अधूरी रह गयी और उन्हें सीआरपीएफ की नौकरी करनी पड़ी ! ऐसे में वीर के पिता और बड़े भाई दोनों ने मिलकर ठाना की अब छोटे भाई को सपनों से समझौता नहीं करने देंगे! उनके पिताजी ने तीन प्रतिशत महीने के ब्याज पर पैसा उधार लिया और बेटे को पढ़ाई के लिये दे दिया !

वीर ने भी अपने पिता और भाई के सहयोग का मान रखा और तीसरी बार में Union Public Service Commission की यह कठिन परीक्षा साल 2018 में 92वीं रैंक के साथ पास कर ली! इस प्रकार दलतपुर गांव के इस बेटे ने सफलता की नयी कहानी लिख दी जो आज सभी युवाओं के लिये प्रेरणास्त्रोत हैं ! 2016 और 2017 में भी वीर प्रताप ने Indian Administrative Service (आईएएस ) परीक्षा दी लेकिन इसमें वह सफल नहीं हो पाए थे ! इस असफलताओ से वे दुखी जरूर हुए लेकिन उन्होंने हर कभी नहीं मने है ! उन्होंने अपने प्रयास और तैयारी को जारी रखा था ! हलाकि उधार का ब्याज बढ़ता जा रहा था ! लेकिन उन्हें विश्वास था कि वह एक दिन सफल जरूर होकर रहे गए और सरे ब्याज को भर देंगे

IAS Success Story : 5 किमी दूर था प्राथमिक विद्यालय

वीर प्रताप का बचपन भी कम संघर्ष से नहीं भरा था ! उनका प्राथमिक विद्यालय तक उनके घर से पांच किलोमीटर दूर था और पैदल चल कर वहां तक जाना होता था! रोज दस किलोमीटर की यात्रा केवल पढ़ने के लिए वह करते थे! गांव में पुल न होने से ऐसा होता था ! वीर प्रताप की प्राथमिक शिक्षा आर्य समाज स्कूल करौरा और कक्षा छह से हाईस्कूल तक की शिक्षा सूरजभान सरस्वती विद्या मंदिर शिकारपुर से हुई ! वीर प्रताप ने फेसबुक पर अपने संघर्षों के बारे में लिखा है कि, “मैंने सफलता की ढेर सारी कहानियां पढ़ीं हैं! मैं भी आज अपनी स्टोरी शेयर करता हूं ! हम जानते हैं कि ज्यादातर Union Public Service Commission सिविल सर्वेंट एलीट क्लास से आते हैं ! मगर तमाम ऐसे भी हैं जो गांवों से निकलते हैं उनकी जिंदगी बहुत संघर्ष भरी होती है!

ब्याज पर लिए पैसे से पढ़ाई

बुलंदशहर में दलपतपुर गांव के रहने वाले IAS राघव के पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपने दम पर पढ़ा सकें ! पिता ने तीन प्रतिशत महीने के ब्याज पर एक व्यक्ति से पैसे लेकर बेटे को तैयारी कराई ! वीर प्रताप ने को बताया कि वह तीसरे प्रयास में इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफल हुए ! इससे पहले 2016 और 2017 में भी उन्होंने UPSC IAS परीक्षा दी थी ! अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से 2015 में बीटेक (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) करने वाले राघव ने वैकल्पिक विषय के तौर पर दर्शनशास्त्र लिया !

खास बात है कि 2018 की मुख्य परीक्षा के रिजल्ट में इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के राघव दर्शनशास्त्र में सबसे ज्यादा स्कोर लाने के मामले में दूसरे स्थान पर रहे ! उन्हें दर्शनशास्त्र में कुल 500 में 306 अंक मिले ! राघव के बड़े भाई का भी सपना आईएएस बनना था !  मगर आर्थिक संकट के कारण उन्हें बीच में ही तैयारी छोड़कर सीआरपीएफ की नौकरी करनी पड़ी !  राघव का कहना है कि तैयारी के दौरान उनके बडे़ भाई ने भी मार्गदर्शन किया !

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

इंजीनियरिंग के बाद वे Union Public Service Commission परीक्षा की तैयारी करना चाहते थे लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे! एक इंटरव्‍यू में वीर ने बताया कि उनके पिता के पास इतने पैसे नहीं थे ! कि वे उन्‍हें पढ़ा सके लेकिन वे बेटे की ख्‍वाहिश को हर हाल में पूरा करना चाहते थे ! तक को दिए एक इंटरव्‍यू में बताया कि उन्‍होंने यह सफलता तीसरे प्रयास में पाई है ! इसके पहले साल 2016 और 2017 में भी उन्होंने परीक्षा दी थी लेकिन वे असफल रहे ! लेकिन Indian Administrative Service मेहनत रंग लाई और 2018 में उन्‍हें 92वीं रैंक हासिल हुई !

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