मनुष्य की जीभ पर मीठा स्वाद पहले आता है जबकि कड़वा स्वाद थोड़ी देर से | GK in Hindi

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जीभ पर कड़वा स्वाद थोड़ी देर से आता है जबकि मीठा पहले , क्यों ! आपके साथ स्वाद से जुड़ी कुछ खास बातें रोज होते हैं ! लेकिन आप कम ही उन पर ध्यान दे पाते हैं ! क्या आपने कभी कुछ कड़वा या मीठा खाते समय महसूस किया है कि कड़वे चीजों का टेस्ट थोड़ी देर से आता है लेकिन मीठा स्वाद पहले आता है। ऐसा क्यों होता है कभी आपने सोचा है ? नहीं! तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ऐसा आखिर क्यों होता है। दरअसल, विज्ञान की माने तो हमारी जीभ पर मुख्य रूप से चार प्रकार की स्वाद कलिकाएं (taste buds) होती हैं, जिनका काम आगे से पीछे की ओर कई तरह का होता है। इस तरह के प्रश्न अक्सर विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओ में General Knowledge GK In Hindi के अंतर्गत पूछे जाते है |

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सबसे पहले आता है मीठा, फिर नमकीन, फिर खट्टा और आखिर में आता है कड़वा ! अगर विस्तार से बताया जाए तो जब आप कुछ मीठा खाते हैं तो वो मीठा ही लगता है ! लेकिन अगर आप कुछ कड़वा खाते हैं तो देर से कड़वा इसलिए लगता है क्योंकि उसकी स्वाद कलिका मीठे और नमकीन के बाद आती है। तो मीठा नमकीन खाकर खट्टा कड़वा हो गया। अब आप समझ ही गए होंगे की ऐसा क्यों होता है। इसलिए जब आप कुछ खट्टा मीठा खाते हैं तो वो बाद मं जाकर कड़वा सा लगने लगता है। कड़वेपन का पता आखिर में चलता है।

क्यों होता है ऐसा जीभ पर कड़वा स्वाद थोड़ी देर से आता है जबकि मीठा पहले!

क्यों होता है ऐसा जीभ पर कड़वा स्वाद थोड़ी देर से आता है जबकि मीठा पहले!
क्यों होता है ऐसा जीभ पर कड़वा स्वाद थोड़ी देर से आता है जबकि मीठा पहले!

अब आपको उदाहरण के तौर पर समझाते हैं जैसे जब हम ककड़ी खाते हैं ! तो शुरुआत में हमें उसके पानी वाले तत्व का स्वाद आता है और थोड़ी देर बाद पता चलता है कि वह कड़वी है। वो इसी वजह से होता है। ऐसे ही खीरे के साथ भी होता है।

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मां के दूध का स्वाद

वहीं इसके अलावा एक और पंचवा स्वाद भी पाया जाता है ! जिसे यूमामी (umami) कहते हैं ! ये एक जापानी शब्द है इसका अर्थ होता है यम्मी ! यह स्वाद मांस, मछली, सॉस, एमसीजी आदि में चीजों में ज्यादा पाया जाता है ! ऐसा कहा जाता है कि इसमें चारों स्वाद जैसं- मीठा, नमकीन, खट्टा, कड़वा का मिश्रण होता है। कई वैज्ञानिकों के अनुसार इसका स्वाद मां के दूध की तरह होता है।

तीखापन क्या होता है ?

तीखापन वो होता है जिसे लोग बेहद उत्साह के साथ खाना पसंद करते हैं ! कई लोग को इसे खाने के लिए काफी लोग उत्सुक रहते हैं ! वो अपने खाने में ज्यादातर तीखा खाना ही पसंद करते हैं ! आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह कोई स्वाद नहीं होता बल्कि एक सेंसेशन होता है, जो तीखा खाने के बाद आपके स्वाद से अलग मुंह से निकलता है।

बचपन और बुढ़ापे में स्वाद की समझ क्यों नहीं होती ?

अब सबसे बड़ा सवाल ये आता है कि बचपन और बुढ़ापे में स्वाद की समझ क्यों नहीं होती ? तो इसके पीछे बात कुछ ऐसी है कि एक वयस्क वयक्ति की जीभ में लगभग 10,000 स्वाद कालिकाय उपस्थित होती हैं, जबकि बच्चों में कम विकसित होती हैं और बुढ़ापे में इनकी संख्या धीरे-धीरे कम होती चली जाती है। इसी कारण बच्चों और बूढ़ों को स्वाद का पता नहीं चलता। विभिन्न परीक्षाओ में General Knowledge के अंतर्गत GK in Hindi में यह प्रश्न पूछा  गया है |

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