कोयले से बिजली का उत्पादन कैसे होता है | यहां जानें GK In Hindi General Knowledge

GK In Hindi General Knowledge कोयले से बिजली का उत्पादन कैसे होता है : आप पूरे दिन में कितनी बिजली का इस्तेमाल करते हैं। चाहे घर हो, ऑफिस हो या कोई बड़ी से फैक्टरी। बिजली तो ज्यादा ही खर्च होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिजली का कोयले से कैसे उत्पादन किया जाता है। चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे होता है। बिजली बनाने के पीछे जो नियम होता है, वो चुम्बक के चलने पर बिजली का पैदा करना होता है। विज्ञान का यही सिद्धांत है की जब एक चुम्बक को तार से लपेट दिया जाए। उसके बाद चुम्बक घूमने लगे तो तार में बिजली बहने लगती है या फिर एक तार को किसी छड़ पर लपेट दिया जाए और इसे किसी चुम्बक के बीच में रख कर घुमाया जाए तो इन तारों में बिजली बहने लगेगी।

कोयले से बिजली का उत्पादन कैसे होता है | GK in Hindi

कोयले से बिजली का उत्पादन कैसे होता है _ यहां जानें GK In Hindi General Knowledge

GK In Hindi कोयले से बिजली का उत्पादन कैसे होता है _ यहां जानें General Knowledge

साल 1831 में माइकिल फेरेड़े नाम के ब्रिटिश वैज्ञानिक ने इस सिद्धांत की खोजा की थी। इस सिद्धांत के हिसाब से उन्होंने पाया की एक ताम्बे के तार को किसी चुम्बक के पास घुमाएं तो उस तार में बिजली बहने लगती है। यानी अगर एक चुम्बक और एक तार जो बिजली से चालता हो के बीच अगर गति है तब तार मं बिजली पैदा होती है।

तार को आप एक बल्ब से जोड़ दें तब यह बल्ब जलने लगेगा। इतना ही नहीं यह आप अपने घर में भी आसानी से कर सकते हैं। घूमते हुए तार की यांत्रिक ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा में बदल जाती है। इसी नियम को आधार मानकर चलते हैं सारे बिजली घर।

पूराने समय से कोयले से बनती आ रही है बिजली – कोयले से बिजली का उत्पादन कैसे होता है

इसके अलावा जब बिजली के उत्पादन के लिए कोयले का प्रयोग किया जाता है तो आम तौर पर पहले इसका चूरा बनाया जाता है और तब बॉयलर युक्त फर्नेस में जलाया जाता है। फर्नेस की ऊष्मा बॉयलर के पानी को भाप में बदल देती है और तब इसका प्रयोग टरबाइन चलाने के लिए किया जाता है। ये टरबाइने जेनेरेटरों को घूमाती है और बिजली पैदा करती है।

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समय के साथ-साथ इस प्रक्रिया की तापगतिकी दक्षता में सुधार हुआ है। ‘मानक’ भाप टरबाइनें कुछ उन्नत सुधार के साथ पूरी प्रक्रिया के लिए लगभग 35% की सर्वाधिक उन्नत तापगतिकी दक्षता प्राप्त कर चुकी हैं जिसका अर्थ है कि कोयला ऊर्जा की 65% अपशिष्ट ऊष्मा आसपास के पर्यावरण में छोड़ी जाती है।

विश्व की लगभग 40% बिजली कोयले से प्राप्त होती है | 

पुराने कोयला विद्युत संयंत्र विशेष रूप से अति प्राचीन संयंत्र में बहुत कम दक्षता वाले हैं और अपशिष्ट ऊष्मा का बहुत अधिक स्तर पर उत्पादन करते हैं। विश्व की लगभग 40% बिजली कोयले से प्राप्त होती है। वहीं कोयले से चलने वाले बिजली घर सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इन्हें थर्मल पावर प्लांट कहते हैं।

इसमें कोयला जला कर पानी को उबाला जाता है। कोयले को फर्नेस में जलाया जाता है जिसके ऊपर बोइलर होता जहां पानी भरा है। कोयला जितना अच्छा होगा उसमें उतनी ज्यादा उष्ण ऊर्जा पैदा होगी। इसलिए कोयले को एकदम पाउडर बना दिया जाता है।

इस तरह काम करती है कोयला और बिजली General Knowledge

GK in Hindi General Knowledge पानी भाप बनकर बहुत ही मोटे पाईप से निकल कर टर्बाइन में जाता है या फिर ऐसा भी होता है की फर्नेस में ही मोटे मोटे पाईप घूमते हैं जिनमें पानी बहता रहता है। यह गर्म हो कर भाप बन जाता है और इन पाईप का एक सिरा टर्बाइन से जुड़ा होता है। भाप की ऊर्जा से टर्बाइन घूमती है। टर्बाइन एक बड़ी सी चकरी होती है जिसमें ब्लेड लगे हैं।

भाप के वेग से यह जोर से घूमने लगती है। यह जितनी तेज़ घूमेगी हमारा बिजली वाला तार भी उतनी तेज़ घूमेगा और उतनी अधिक बिजली पैदा होगी। इसलिए इस टर्बाइन पर भाप को बहुत ऊँचे दबाव और ऊंचे तापमान से लाया जाता है। टर्बाइन हमारी उस छड़ से जुड़ा है जिस पर तार बंधे हैं और जो चुम्बक के बीच में रखा है। इस को जेनेरेटर कहते हैं।

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