पेड़ों से जो गोंद निकलती है उसका निर्माण कैसे होता है | यहां पढ़ें GK In Hindi General Knowledge

GK In Hindi General Knowledge पेड़ों से जो गोंद निकलती है उसका निर्माण कैसे होता है : आपने किताबों में इसके बारे में पड़ा होगा कि पेड़ों से गोंद को निकाला जाता है, वह बेहद पक्का होता है ! जब भी हम किसी चीज को चिपकाते हैं तो उसते लिए पक्के और अच्छे गोंद की जरूरत पड़ती हैं, जिसके लिए हम ज्यादा तर दुकान से गोंद लाते हैं, लेकिन क्या आपको पता होता है कि जिस गोंद का इस्तेमाल आप करते हैं, वो कैसे बनता है इस बारे में आपको पता होता है !

पेड़ों से जो गोंद निकलती है उसका निर्माण कैसे होता है | यहां पढ़ें GK In Hindi General Knowledge

पेड़ों से जो गोंद निकलती है उसका निर्माण कैसे होता है In Hindi

पेड़ों से जो गोंद निकलती है उसका निर्माण कैसे होता है In Hindi

ये तो आफ जानते ही हैं कि पेड़ों से गोंद को निकाला जाता है, लेकिन पेड़ इस गोंद को कैसे बनाते हैं इस बारे में आपको पता है ! आज अपनी इस पोस्ट में आपको इस बारे में थोड़ी जानकारी देने जा रहे हैं ! पेड़ों से निकलने वाली गोंद उनमें किसी तरह के तनाव के फलस्वरूप होने वाली एक रक्षात्मक प्रक्रिया है ! जैसे मनुष्यों में चोट लगने पर थक्का जम जाता है उसी तरह से !

पेड़ से गोंद का निर्माण | GK In Hindi

रासायनिक तौर पर ये पेड़ों से उत्पन्न होने वाले ये मेटाबॉलिक प्रोडक्ट्स ( Metabolic products ) होते हैं जिनमें कार्बोहाइड्रेट ( Carbohydrate ) के पॉलीमर्स ( Polymers ) होते हैं ! खास तौर से रेसिंस ( Resin ) और हाइड्रॉक्सीप्रोलाइन प्रोटीन ( Hydroxyproline protein ) ! हीं ये पौधों की कुछ मुख्य फैमिलीज ( Families ) की प्रजातियों नीम, खैर, पलास, बबूल, सेमल में स्त्रावित होता है और इस प्रकिया को gummosis कहते हैं ! ज्यादातर गोंद का निर्माण तने या बीज से होता है पर कुछ पौधों में जड़ से भी होता है !

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निकालने की विधि | General Knowledge

GK In Hindi General Knowledge इसके लिए पौधों को इसके बहाव के लिए उत्तेजित करना पड़ता है, जिसके लिए जमीन से करीब 3 फुट ऊपर और 10 इंच चौड़ाई में उसकी छाल को पट्टियों के रूप में काटकर तोड़ देते हैं ! फिर तने में एक v की आकृति बनाकर उसमें एक लकड़ी कसकर उसमें बाल्टी लटका देते हैं, कुछ समय बाद गोंद रिसनी शुरू हो जाती है जिसे बाल्टी में इकठ्ठा कर लेते हैं ! ये प्रक्रिया छाल तोड़ने के करीब 3 से 4 हफ्ते बाद शुरू करते हैं !

अक्सर लोग गोंद के लड्डू का सेवन करते हैं लेकिन गोंद को भून कर खाने से भी कई बिमारियां दूर होती हैं। प्रोटीन,फाइबर,विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर गोंद का सेवन कैंसर से लेकर दिल की बीमारियों को दूर करता है।

गोंद के औषधीय गुण –

  • किसी पेड़ के तने को चीरा लगाने पर उसमे से जो स्त्राव निकलता है वह सूखने पर भूरा और कडा हो जाता है उसे गोंद कहते है .यह शीतल और पौष्टिक होता है . उसमे उस पेड़ के ही औषधीय गुण भी होते है . आयुर्वेदिक दवाइयों में गोली या वटी बनाने के लिए भी पावडर की बाइंडिंग के लिए गोंद का इस्तेमाल होता है |
  • कीकर या बबूल का गोंद पौष्टिक होता है |
  •  नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है।इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है . इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है – पलाश के गोंद से हड्डियां मज़बूत होती है  | पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है।
  • आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बह जाती है और आसानी से भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाता है GK In Hindi General Knowledge।

सेमल का गोंद मोचरस कहलाता है, यह पित्त का शमन करता है।अतिसार में मोचरस चूर्ण एक से तीन ग्राम को दही के साथ प्रयोग करते हैं। श्वेतप्रदर में इसका चूर्ण समान भाग चीनी मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी होता है। दंत मंजन में मोचरस का प्रयोग किया जाता है।

गोंद क्या है

GK In Hindi General Knowledge किसी पेड़ के तने को चीरा लगाने पर उसमे से जो स्त्राव निकलता है वह सूखने पर भूरा और कड़ा हो जाता है उसे गोंद (Gum) कहते हैं। यह शीतल और पौष्टिक होता है। उसमें उस पेड़ के ही औषधीय गुण भी होते हैं। आयुर्वेदिक दवाईयों में गोली या वटी बनाने के लिए भी पाउडर की बाइंडिंग के लिए गोंद का इस्तेमाल होता है। सर्दियों में इसे खाने से पुरानी खांसी, जुकाम, फ्लू और इंफेक्शन जैसी समस्याएं नहीं होती। रोजाना गोंद को भून कर खाने से शरीर अंदर से गर्म रहता है, जो आपको कई बीमारियों से दूर रखता है।

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