भारत में पहली बार भरतीय रुपया कहाँ पर छापा गया था | GK In Hindi General Knowledge

Where was the Indian Rupee printed for the first time in India : भारत में 18 वीं शताब्दी के अंत में बैंक ऑफ बंगाल द्वारा मुगल साम्राज्य के पतन के बाद पहली मुद्रा जारी की गई थी ! और ऐसा लग रहा था कि आप कभी भी कुछ भी नहीं कर सकते हैं ! आज ये पहले कुछ नोट इतने दुर्लभ हैं कि वे बेशकीमती संग्राहकों के टुकड़े हैं ! प्रत्येक लाख में बेच सकता है ! ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की विस्तारवादी नीतियों के कारण बंगाल में सोने और चाँदी के बुलियन की कमी हो गई थी ! ऋण संकट से जूझते हुए अंग्रेजों ने दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाले अपने कर्मचारियों को भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कागजी मुद्रा लाने का फैसला किया !

Where was the Indian Rupee printed for the first time in India GK In Hindi

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Where was the Indian Rupee printed for the first time in India GK In Hindi

भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट के अनुसार इस नोट की छपाई को पहली बार 1926 में बंद किया गया क्योंकि इसकी लागत अधिक थी ! इसके बाद इसे 1940 में फिर से छापना शुरु कर दिया गया जो 1994 तक अनवरत जारी रहा ! बाद में इस नोट की छपाई 2015 में फिर शुरु की गई ! इस नोट की सबसे खास बात यह है कि इसे अन्य भारतीय नोटों की तरह भारतीय रिजर्व बैंक जारी नहीं करता बल्कि स्वयं भारत सरकार ही इसकी छपाई करती है ! इस पर रिजर्व बैंक के गवर्नर का हस्ताक्षर नहीं होता बल्कि देश के वित्त सचिव का दस्तखत होता है !

इसकी शुरुआत का इतिहास भी बड़ा दिलचस्प है ! हुआ यूं कि दौर था पहले विश्वयुद्ध का और देश में हुकूमत थी अंग्रेजों की ! उस दौरान एक रुपये का सिक्का चला करता था जो चांदी का हुआ करता था लेकिन युद्ध के चलते सरकार चांदी का सिक्का ढालने में असमर्थ हो गई और इस प्रकार 1917 में पहली बार एक रुपये का नोट लोगों के सामने आया ! इसने उस चांदी के सिक्के का स्थान लिया ! ठीक सौ साल पहले 30 नवंबर 1917 को ही यह एक रुपये का नोट सामने आया जिस पर ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम की तस्वीर छपी थी !

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भारत में पहली बार भरतीय रुपया कहाँ पर छापा गया था (GK In Hindi)

पहले छपती थी किंग जॉर्ज की तस्वीर-अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भारतीय रुपयों पर किंग जॉर्ज की तस्वीर छपी होती थी !और रुपए की गणना 16 आनों में होती थीतब आपने चार आनेआठ आने के सिक्के भी देखे होंगे !जिसे आप चवन्नी और अठन्नी कहकर पुकारते थे ! सोलह आने खरा ये मुहावरा भी रुपए की इसी गणना प्रणाली से निकला हुआ है ! लेकिन 1957 के बाद इस प्रणाली को बदलकर दशमलव प्रणाली लाई गई और रुपए 100 पैसों में तब्दील हो गया ! भारत आजाद होने के बाद भी दो साल तक किंग जॉर्ज वाली मुद्रा ही भारत में चलन में रही !1949 में इसमें तब्दीली की गई और नोटों पर अशोक स्तंभ छापा गया !

भारतीय करंसी पर महात्मा गांधी की तस्वीर को पहली बार 1987 में इस्तेमाल किया गया था ! लेकिन तब 500 रुपए के नोट पर सिर्फ इसे वाटरमार्क के तौर पर ही इस्तेमाल किया गया था ! इसके बाद आरबीआई ने 1996 में नोटों में बदलाव का फैसला लिया और अशोक स्तंभ की जगह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के फोटो का इस्तेमाल किया गया ! नोट से अशोक स्तंभ को हटाया नहीं गया बल्कि इसे नोट के बायीं तरफ निचले हिस्से पर अंकित कर दिया गया !

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GK In Hindi General Knowledge प्रारंभ में नोट निजी बैंकों द्वारा जारी किए गए थे लेकिन आज हम जो कुछ भी लेते हैं वे बहुत अलग थे ! सबसे पुराने नोट बैंक ऑफ हिंदोस्तान (1770-1832) जनरल बैंक ऑफ बंगाल और बेहार (1773-75) वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा स्थापित) और बंगाल बैंक (1784-91) द्वारा जारी किए गए थे ! हालाँकि ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन नोटों की वैधता को मान्यता नहीं दी थी और वे निजी वचन पत्र बने रहे है ! इस प्रकार इसका उपयोग प्रतिबंधित किया गया ! आश्चर्य की बात नहीं ये गैर शुरुआत थे और यहां तक ​​कि 1832 में जब 3 बैंक बंद हो गए वित्तीय कुप्रबंधन के कारण प्रचलन में बहुत कम नोट थे !

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