Jaya Kishori : साध्वी जया किशोरी कौन हैं, स्टार कथावाचिका जिनके भजनों के करोड़ों हैं दीवाने

Jaya Kishori : साध्वी जया किशोरी कौन हैं, स्टार कथावाचिका भजनों के करोड़ों हैं दीवाने | साध्वी जया किशोरी यूट्यूब से लेकर फेसबुक पर लाखों की फैंस फॉलोइंग हैं। फैंस की फेहरिस्त ऐसी कि सिने तारिकाएं भी इनके मुकाबले फीकी जान पड़ें। नाम है जया किशोरी और काम भजन व भागवत कथा पढऩा। जया कॉमर्स ग्रेजुएट हैं। महज 7 साल की उम्र से भजन गायकी कर रहीं। कथक और हिंदुस्तानी संगीत की भी तालीम ली है। देश के विभिन्न शहरों में कथा कर रही हैं। अभी-अभी पढ़ाई खत्म हुई है, रेगलुर क्लासेस और लंबी छुट्टियां नहीं मिलने से कथा पढऩे अब्रॉड नहीं जा रही हैं । डेढ़ साल तक भागवत सीखा उसके बाद मंचों पर पढऩा शुरू किया।

Jaya Kishori : साध्वी जया किशोरी कौन हैं, स्टार कथावाचिका भजनों के करोड़ों हैं दीवाने

Jaya Kishori : साध्वी जया किशोरी कौन हैं, स्टार कथावाचिका भजनों के करोड़ों हैं दीवाने
Star KathaVachika Sadhvi Jaya Teenager

इन दिनों गुढिय़ारी स्थित मारूति मंगलम भवन 22 जनवरी तक दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक कथावाचन कर रही हैं। रविवार को पत्रिका से खास बातचीत में उन्होंने भागवत कथा, नानी मायरो और भजन के क्षेत्र से जुड़ी बातें शेयर की। उन्होंने गृहस्थी बसाने के सवाल पर कहा कि मैं साधारण लड़की हूं, कोई संत या साध्वी नहीं ।

अध्यात्म में आने के सवाल पर जया ने बताया कि मुझे खुद पता नहीं कि कैसे इस क्षेत्र में आ गई। जब मैंने भजन शुरू किया तब महज 7 साल की थी। कुछ चीजें हैं जो बस होती जाती हैं, रास्ते में पड़ती जाती हैं और आप आगे बढ़ते जाते हैं। मेरे पापा नानी बाई का मायरा सुना करते और रोया करते थे। मैंने उनसे वजह पूछी तो मुझे भी सुनाया। उस वक्त मैं पूरी तरह से समझ नहीं पाई लेकिन इसे गाना है यह तय कर लिया था। डेढ़ साल सीखने में लगे ।

जया कर चुकी न जाने कितने स्‍थानों पर भागवत

कितने स्थानों पर भागवत कर चुकीं के सवाल पर कहा, मेरे पापा यहां आए होते तो जरूर जवाब देते। मैंने कभी गिना नहीं। वैसे कहा भी गया है कि हर चीज को गिनना नहीं चाहिए अच्छी बात नहीं। एनआरसी पर बोलीं उस क्षेत्र का मुझे ज्यादा ज्ञान नहीं है लेकिन यही कहूंगी कि जो देश के लिए अच्छा हो उसके लिए हमें मदद करनी चाहिए। इसके लिए थोड़ी परेशानी भी आए तो सहन करना चाहिए।

जया सोचती हैं कि शायद मुझे कथाकार ही बनना था

वर्ष के बच्चे यह सोचते नहीं है कि क्या बनना है। जैसे-जैसे चीजें आगे बढ़ती गईं वैसे-वैसे समझ में आने लगा कि शायद कथाकार ही बनना है। शुरुआत में नृत्य और भजन में रुचि थी फिर कथा में। पहले यह समझ नहीं आया कि कला क्या है या रुचि कहां है। बाद में लगा कि किसी भी अच्छी चीज को किसी भी रूप में एक्सप्रेस कर सकें। इसलिए नृत्य नाटिकाकथा में नृत्य नाटिका रखने का मकसद ये है कि बच्चों का ध्यान झांकियों पर ज्यादा जाता है। वे बेहतर तरीके से कथा को समझ पाते हैं। मुझे भी उन्हें देखना अच्छा लगता है।

फैमिली के लिए संस्कार और माहौल अच्छा हो

मेरे घर वालों ने कभी रोका नहीं कि घूमने जाने या दोस्तों से मिलने के लिए। हमारे यहां नियम यह था कि रोजाना शाम को हनुमान चालीसा होगा जिसमें सभी शामिल होंगे। हफ्ते में एक दिन कीर्तन होंगे जिसमें पूरा परिवार बैठेगा चाहे कुछ भी हो जाए। जितनी चीजें संसार में जरूरी है उतनी ही भगवान भ। भगवान को लकर संसार में कहीं भी जाएं आप गलत कदम नहीं उठाएंगे। विश्वास और डर दोनों बना रहता है। कई बार तो लोग बच्चों के सामने ही कह देते हैं आज टाइम नहीं है पूजा कल कर लेंगे। घर का माहौल और संस्कार अच्छे होने चाहिए।

स्टूडेंट्स के लिए 100 प्रतिशत दें

सिर्फ एग्जाम ही नहीं बल्कि सालभर मेहनत करें। अपना हंड्रेस परसेंट दें। जब पता ही नहीं आगे क्या होगा तो फिक्र क्यों। जब आपको पता है कि आगे क्या होगा, तो भी व्हाय वरी। पैरेंट्स फिजूल का प्रेशर न क्रिएट करें। न ही किसी से तुलना। मेरे घर में एक नियम है। पैरेंट्स कहते थे कि हमको दिखना चाहिए कि तुम मेहनत कर रही हो, रिजल्ट क्या आएगा मतलब नहीं। हमारी नजर में तुमने 100 परसेंट दिया है तो कोई क्या कहता है फिक्र नहीं।

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