ट्रेन रात में समय पटरी कैसे बदल लेती है | यहां जानें General Knowledge GK in Hindi

General Knowledge GK in Hindi ट्रेन रात में समय पटरी कैसे बदल लेती है | ट्रेन में पटरी बदलने के लिए कोई स्ट्रिंग नहीं होता है ! इसके बावजूद रेलगाड़ी बिना चुके रात के समय पटरी बदल लेती है | अक्सर जब हम ट्रेन से सफर करते हैं तो रेलवे स्टेशन पर Train पटरी बदलती है | जब हम देखते हैं तो पलक झपकते ही ट्रेन अपनी पटरी बदल लेती है | दिन हो या रात रेलगाड़ी आसानी से अपनी पटरी बदल लेती है | जबकि रेल चालक निचे झाक कर तो देखता नहीं है |ट्रेन रात में समय पटरी कैसे बदल लेती है |  रेल तो अपनी पटरी के हिसाब से चलती है | दिन हो या रात उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है |

ट्रेन रात में समय पटरी कैसे बदल लेती है | यहां जानें General Knowledge GK in Hindi

ट्रेन रात में समय पटरी कैसे बदल लेती है _ यहां जानें GK In Hindi

ट्रेन रात में समय पटरी कैसे बदल लेती है _ यहां जानें GK In Hindi

रेलवे की टेक्निकल जानकारी रखने वाले राजेंद्र अग्निहोत्री के अनुसार ट्रेन को पटरी बदलने की जरूरत रास्ता बदलने के लिए या रेलवे स्टेशन पर रेल को साइड में लगाने के लिए होती हैं | ट्रेन लोको पायलट के लिए यह काम बहुत ही आसान होता है | रेल पटरी का साँ लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है कि नहीं मना बोल क्यों नहीं रहे हैंचा ही कुछ ऐसा होता है कि ट्रेन के पहिए को मोड़ने में कोई दिक्कत नहीं होती है |

नीचे चित्र में मुड़ने वाली पटरी नुकीली दिखाई दे रही है | इसे टेक्निकल भाषा में तीसरे लिखा जाता है | इसमें एक दाँया स्विच रेल और एक बाँया स्विच रेल होता है | जिसकी मदद से ट्रेन को एक रास्ते से दूसरे रास्ते पर मोड़ा जाता है | यह आपस में टाई बार से जुड़ी होती है जिसे विलियम स्ट्रेचर बार (William Strecher Bar) कहते हैं ! यह दोनों एक साथ चलती है | आवश्यकतानुसार इन्हें चालू और बंद किया जा सकता है |

यदि बायीं स्विच रेल बाहरी रेल से चिपकी हुयी रहती है तो बायीं स्विच रेल खुली हुयी रहेगी |उपरोक्त चित्र में जिस तरह साँधा लगा हुआ है इसमें बायीं और का साँधा चिपका हुआ है और दायी और का साँधा खुला है इस हिसाब से ट्रेन दायीं और जाएगी | इस तरह ट्रेन पटरी बदलकर डायल चले जाएगी | ऐसे ही इसके विपरीत भाई और किसी से खोल देने पर रेलगाड़ी बायीं और चले जाएगी |

यह भी जाने :- ऑपरेशन करने के बाद टांका लगाने के लिए कौन से धागे का उपयोग किया जाता है | GK in Hindi

रेलगाड़ी का साँधा चलता कहाँ से है |

आपने देखा होगा कि रेलवे स्टेशन के दोनो और एक दोमंजिल की ऊँची इमारत बनी हुई होती है ! इसी मंजिल में बने केबिन से सांधे को चलाया जाता है ! और यहीं से ट्रेन को सिग्नल भी दिए जाते हैं ! यह साँधा 33MM की गोल रॉड से केबिन से एक लिवर से जुड़ा होता है | लिवर को खींचने पर यह साँधा चलता है | अब टेक्नोलॉजी आने के कारण बिजली के सिग्नल आ गए है |

हो अब यह साँधा बिजली की छोटी सी मोटर से चलते हैं | यह मोटर बिजली के केबिन से केबल से जुड़ी हुई होती है | आजकल रेलवे स्टेशन के दोनों ओर से की बिंदी समाप्त होने लगे हैं ! और स्टेशन से एक बिजली के पैनल से सांधे को मैनेज किया जाता है ! इन साँधो के 180 मीटर दूर एक होम सिगनल लगा हुआ होता है ! जब किसी स्टेशन का स्टेशन मास्टर अपने पिछले स्टेशन को किसी रेलगाड़ी को आने के लिये लाइन क्लियर दे देता है |

यह भी जाने :- ऐसा कौनसा फल है जो हर तरफ से बंद होता है लेकिन उसके अंदर कीड़े होते हैं | यहां जानें

GK In Hindi General Knowledge

तब वह साँधे को उस लाइन की ओर सैट करता है, जिस लाइन से उसे रेलगाड़ी निकालनी हो। इसके बाद होम सिगनल देता है | तभी रेलगाड़ी स्टेशन के अन्दर प्रवेश कर पाती है। नहीं तो होम सिगनल पर ही खड़ी रहेगी और सिगनल मिलने का इंतजार करेगी ।

तो आपको पता चल गया होगा कि रेलगाड़ी पटरी कैसे बदलती है ! यह प्रश्न GK Question सामान्य ज्ञान (General Knowledge) प्रश्नोत्तरी है ! सभी प्रतियोगी परीक्षाओ में GK In Hindi gktoday मैं ऐसे प्रश्न पूछे जाते हैं ! इसे Science GK Questions में सेव कर लेना है ! और हिंदी करंट अफेयर्स (Today Current Affairs in Hindi) की जानकारी के लिए SRB Post पर प्रतिदिन विजिट करते रहे |

यह भी जाने :-  कोयले से बिजली का उत्पादन कैसे होता है | यहां जानें GK In Hindi General Knowledge