Small Business Idea : कूलर बनाने का बिजनेस शुरू कर आप सालाना कमा सकते है 50 लाख रुपये तक

Starting Business Of Making Coolers 50 lakh  : यदि आप भी बिजनेस करना चाहते है ! तो आप कूलर बनाने का बिजनेस शुरू कर सकते है ! इस बिजनेस में काफी मुनाफा भी होता है और मेहनत भी काम लगती है ! इस बिजनेश को शुरू करने से पहले आपको एक खली बड़ा सा एक कमरा लेना होगा या किराये ओर भी ले सकते है ! आज की दिनों में ऐसे लोग है ! जिनके यह भलेही रहने की जगह न हो वो भी गर्मी से बचने के लिए अपने घर में कुरल लेना चाहेगा ! क्योकि की कुदरत की इस गर्मी से लोगो को कूलर ही बचा सकता है ! गर्मियों के दिनों में कूलर बहुत ही ज्यादा डिमांड बानी रहती है !

 Starting business of making coolers 50 lakh 

 Starting business of making coolers 50 lakh 
Starting business of making coolers 50 lakh

कूलर का एक ऐसा बिजनेस है जो सदा ही चलता रहता है  इस बिजनेस के साथ में आपको पंखे का भी बिजनेस करना चाही क्योकि इंसान आपकी दुकान पर आया है तो आप की दुकान से उसे खली हाथ जाना न पड़े ! यदि वह कूलर नहीं ले सकता है तो उसे पंखे लेने के लिए मंजूर कर दो  पर उसे कुछ न कुछ दो ! इस सीजन में आप ऐसा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं! जो शुरू होने के बाद ही रिटर्न देना शुरू कर दे तो आपको रूम कूलर बनाने की यूनिट लगानी चाहिए ! यह एक अच्‍छा मौका है, जब रूम कूलर बनाने की यूनिट लगाकर अपने बिजनेस की शुरुआत कर सकते हो ! जो आगे आने वाले समय में भी अच्‍छा खासा चलेगा !

इस बिजनेस में संभावनाओं को देखते हुए सरकार की स्‍कीम में भी आपको लोन मिल जाएगा ! बस जरूरत है कि आप एक अच्‍छी प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट तैयार करें और प्रधानमंत्री रोजगार योजना या मुद्रा स्‍कीम के तहत लोन के लिए अप्‍लाई करें ! क्‍या होगी प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट सबसे पहले आपको लोन लेने के लिए एक प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट तैयार करनी होगी ! प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत सरकार ने कुछ प्रोजेक्‍ट प्रोफाइल तैयार किए हैं ! अगर इसी प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट को आधार बनाएं तो कैपिटल एक्‍सपेंडिचर पर 1.5 लाख और वर्किंग कैपिटल पर 3 लाख 20 हजार रुपए खर्च का अनुमान लगाना होगा ! यानी कि आपके प्रोजेक्‍ट की कॉस्‍ट 4 लाख 70 हजार रुपए होगी ! इसमें से आपको 47 हजार रुपए का इंतजाम करना होगा ! बाकी 90 फीसदी के लिए आपको लोन अप्‍लाई करना होगा !

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कूलर कैसे बनाएं

गभग एक दशक पूर्व तक आराम तथा सुख सुविधा की वस्तु समझे जाने! वाले कूलर्स आज प्रत्येक कार्यालय’दुकान के लिये अनिवार्य आवश्यकता की वस्तु बन चुके हैं ! देश के इस भाग (मध्य प्रदेश) में गर्मी का मौसम काफी लंबा (फरवरी से सितंबर-अक्टूबर तक) होने की वजह से तथा अप्रैल से जून के मध्य तक अत्यधिक गर्मी पड़ने की वजह से कूलर्स का उपयोग तीव्र गति से बढ़ा है !

यद्यपि प्रारंभ में मध्य प्रदेश के अधिकतर उद्यमी कूलर के विभिन्न पार्टस दिल्ली से लाकर उन्हें ! यहाँ असेम्बल कर विक्रय करने का कार्य करते थे परन्तु कूलर्स की उत्तरोत्तर मांग! बढ़ने उपभोक्ताओं द्वारा विभिन्न विशिष्टियों के कूलर्स की मांग करने तथा स्थानीय रूप से कूलर्स उत्पादित करना है ! ज्यादा लाभकारी प्रतीत होने के कारण पिछले कुछ वर्षों से कूलर्स के निर्माण की अनेकों इकाइयां मध्य-प्रदेश में स्थापित हुई हैं !

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कूलर उत्पादन/निर्माण की प्रक्रिया/विधि 

कूलर्स के निर्माण की प्रक्रिया में सर्वप्रथम स्टील की स्टील की निश्चित साईजों में कटिंग की जाती है ! इसके उपरांत इस शीट की जाली कटिंग मशीन से बनाई जाती है ! इसके उपरांत शीट को मोड़कर तथा बैन्ड करके कूलर की बाडी बनाई जाती है ! कूलर बॉडी में पंखा, खस तथा पंप फिट कर दिया जाता है ! इस निर्मित उत्पाद का फिर परीक्षण किया जाता है तथा अंततः इसे स्प्रे पेंटिंग करके विपणन हेतु प्रस्तुत कर दिया जाता है ! इस इकाई में लगने वाली प्रमुख उपयोगिता विद्युत तथा गैस की है ! 5 हा. पा. का विद्युत कनेक्शन इस इकाई के संचालन के लिए आवश्यक होगा जिस पर प्रतिमाह 3000 रु. का व्यय होना अनुमानित है ! इसी प्रकार गैस पर प्रतिमाह 500 रु. का व्यय होना अनुमानित है ! कुल मिलाकर उपयोगिताओं के लिए प्रतिमाह 3500 रु. के व्यय का प्रावधान इस इकाई में किया गया है !

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